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फैसला आने के बाद बोली कांग्रेस – हम राम मंदिर निर्माण के पक्ष में….

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नई दिल्ली: कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने शनिवार को कहा कि वह अयोध्या मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है। पार्टी ने साथ ही कहा कि अब सभी को शांति एवं सौहार्द सुनिश्चित करना चाहिए।

CWC की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है।’ कोर्ट के फैसले पर बात करते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस राम मंदिर निर्माण के पक्ष में है।

पार्टी ने कहा, ‘’हम सभी संबंधित पक्षों और सभी समुदायों से निवेदन करते हैं कि वे भारत के संविधान में स्थापित सर्वधर्म समभाव तथा भाईचारे के उच्च मूल्यों को निभाते हुए अमन-चैन का वातावरण बनाए रखें।’ पार्टी ने आह्वान किया, ‘हर भारतीय की जिम्मेदारी है कि हम सब देश की सदियों पुरानी परस्पर सम्मान और एकता की संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत रखें।’

पार्टी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला किसी एक व्यक्ति, समूह, समुदायों या राजनीतिक दलों की जीत या हार का मामला नहीं हो सकता। बता दें कि अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ढांचे पर अपना एक्सक्लूसिव राइट साबित नहीं कर पाया।

कोर्ट ने विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया, तो मुसलमानों को दूसरी जगह जमीन देने के लिए कहा है। कोर्ट ने साथ ही कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार तीन महीने में योजना बनाए। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन मिलेगी। फिलहाल अधिकृत जगह का कब्जा रिसीवर के पास रहेगा. पांचों जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया है। फैसला पढ़ने के दौरान पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था।

CJI ने कहा कि ASI ने भी पीठ के सामने विवादित जमीन पर पहले मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं। CJI ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्म स्थल मानते हैं। हालांकि, ASI यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि वहां दोनों ही पक्ष पूजा करते थे।

रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी. साथ ही सबूत पेश किए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे। साथ ही CJI ने कहा कि सूट -5 इतिहास के आधार पर है जिसमें यात्रा का विवरण है। सूट 5 में सीतार रसोई और सिंह द्वार का जिक्र है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है। CJI ने कहा कि 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिंदुओ पर कोई रोक नहीं थी। मुसलमानों का बाहरी आहते पर अधिकार नहीं रहा।


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