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गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक को केबिनेट ने दी मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दे दी गई है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदुओं, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

अब इस बिल को अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है। मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल के दौरान इसी साल जनवरी में बिल लोकसभा में पास करा लिया था, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण राज्यसभा में अटक गया था। विपक्ष ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बताया। उनकी मांग है कि श्रीलंका और नेपाल के मुस्लिमों को भी इसमें शामिल किया जाए।

असम एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहां अधिकतर हिंदू प्रवासी रह रहे हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, सपा, राजद, माकपा, बीजद और असम में भाजपा की सहयोगी अगप विधेयक का विरोध कर रही हैं। जबकि, अकाली दल, जदयू, अन्नाद्रमुक सरकार के साथ हैं।

सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने भी ट्विटर के जरिए मोदी सरकार बिल को लेकर आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि नागरिकों को धर्म के आधार पर नहीं बांटा जा सकता है। यही वजह है कि इस बिल का समर्थन नहीं किया जा सकता है, ये बिल भारत के आधार को ही तोड़ता है। उन्होंने लिखा कि भारत के नागरिक, सिर्फ नागरिक हैं। उन्हें उनके धर्म, जाति के आधार पर नहीं बांटा जा सकता है।

वहीं कांग्रेस नेता शशि थरूर का कहना है कि वह नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने जा रहे हैं, क्योंकि नागरिकों को धर्म के आधार पर बांटा नहीं जा सकता है। कांग्रेस के अलावा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस बिल के विरोध में हैं।


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