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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने एक साथ तीन तलाक को अपराध करार देने वाले कानून काे सुप्रीम काेर्ट में चुनाैती दी है। सोमवार को सुप्रीम काेर्ट में दायर याचिका में इस कानून काे मनमाना करार दिया गया है।

एआईएमपीएलबी और कमाल फारुकी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि यह कानून मुसलमानों की जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गलत प्रभाव डाल रहा है। चूंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 20, 21, 25 और 26 का उल्लंघन करता है। इस कानून के चलते तीन तलाक बोलना अपराध माना जाएगा।

यह हनफी मुस्लिमाें पर लागू होने वाले मुस्लिम पर्सनल लॉ की अनावश्यक/गलत व्याख्या करता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह कानून मनमाना, अवांछित और गलत तरीके से तीन तलाक को अपराध करार देता है। इससे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन होता है। इससे एक नागरिक की निजता का उल्लंघन होता है।

नए कानून के तहत तलाक-ए-बिद्दत होने की जानकारी पति या पत्नी की मर्जी के बगैर पत्नी से संबंधित कोई भी व्यक्ति दे सकता है। इसमें पत्नी के रक्त संबंधी से लेकर शादी से जुड़े रिश्तेदार भी शामिल हैं। इस कानून के जरिए शादी से जुड़ी बेहद आंतरिक बातें भी सार्वजनिक हो जाती हैं। लिहाजा, इससे प्रतिष्ठा और निजता के अधिकारों को भी क्षति पहुंचती है।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 में तलाक-ए-बिद्दत या तलाक के ऐसे ही अन्य रूप, निरर्थक और अवैध करार दिए गए हैं। यह कानून बोलकर, लिखकर, एसएमएस अथवा वाट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक बार में तीन तलाक कहने काे अवैध करार देता है। ऐसा करने पर दोषी पति को तीन साल की कैद हो सकती है या उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।


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